(1) हिन्दी साहित्य के इतिहास के संबंध में 'मॉडर्न बरनाक्यूलर 'लिटेचर ऑफ हिन्दोस्तान' किसने लिखा है ? UPTET(Paper 1)-2022
(2) “बिरहनी बावरी सी भई ऊँची चढ़ि अपने भवन में टेरत हाय दई ले अंचरा मुख अँसुवन पोंछत उपरे गात सह" - किसकी पंक्ति है? UPTET(Paper 1)-2022
(3) हिन्दी का पहला पत्र है UPTET(Paper 1)-2022
(4) “सुई' का तत्सम रूप क्या है ? UPTET(Paper 1)-2022
(5) “परिसीमन" का विलोम है UPTET(Paper 1)-2022
(6) “धूसर" शब्द का पर्याय है UPTET(Paper 1)-2022
(7) “भूतों अर्थात् जीवों द्वारा होने वाला (दुख)' - वाक्य के लिए एक शब्द बताइये । UPTET(Paper 1)-2022
(8) “ऊँट की चोरी निहुरे निहुरे" का अर्थ है UPTET(Paper 1)-2022
(9) निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 56 से 60 तर्क का सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए । धर्म पालन काले के मार में सबसे अधिक बाधा चित्त की चंचलता, उद्देश्य की अस्थिसता और मन की निर्बलता से पड़ती है । मतुष्य के कर्तव्य मार्ग में एक ओर तो आत्मा के बुर-भले कामों का ज्ञान दूसरी ओर आलस्य और स्वार्धपरता रहती है । बस मनुष्य इन्हीं दोनों के बौच में पड़ा एहा है । अंत में यदि उसका मन पक्का हुआ, तो वह आत्मा की आज्ञा मानकर अपना धर्म पालन करता है, पर उसका मन दुविधा में पड़ा रहा है, तो स्वार्धपरता उसे निश्चित ही घेरेगी और उसका चित्र घृणा के योग्य हो जायेगा । इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि आत्मा जिस बात को करने की प्रवृत्ति दें, उसे बिना स्वार्थ सोचें, झटपट कर डालना चाहिए । इस संसार में जितने बड़े-बड़े लोग हुए हैं सप्नी ने आपने कर्तव्य को सबसे श्रेष्ठ माना है, क्योंकि जितने कर्म उन्होंने किए उन सबने अपने कर्तव्य पर ध्यान देकर न्याय का बर्ताव किया । जिन जातियों में यह गुण पाया जाता है । वे ही संसार में उन्नति करती हैं और संसार में उनका नाम आदर से लिया जाता है । जो लोग स्वाधी होकर अपने कर्तव्य पर ध्यान नहीं देते, वे संसार में 'लज्जित होते हैं और सब लोग उनसे घृणा करते हैं । धर्म पालन के में बाधा डालने वाली प्रवृत्तियाँ कौन-सी हैं ? UPTET(Paper 1)-2022
(10) संसार के बड़े-बड़े लोगों ने सबसे श्रेष्ठ माना है UPTET(Paper 1)-2022